Poem No.1
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Title-> गले लगा ले माँ
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आईना देख के मुझकों बोल
क्या हुआ तेरी सूरत को
मुझसे ना रहा गया और आंसुओ की बरसात हो गई
तेरे लिए दुनिया की सारी खुशिया ला दू
तेरे लिए सारा जहाँ लुटा दु बस एक बार गले से लगा ले माँ
तेरा ही हु तेरा ही रहूँगा बस एक बार बेटा तो बुलादे माँ
तेरे अहसान तो में क्या चुकाऊ
वो तो भगवान भी नही चूका सकता
बस एक बार सीने से लगा दे माँ
सो गया ये जहाँ पर में अकेला हु माँ बस एक बार गोदी सुलादे माँ
माना में बुरा हु पर इतना भी नही जो तू मुझसे नाराज हो जाये माँ
माना मेने कभी कोई ऐसा काम नही किया
जिस से तेरा सर फक्र से ऊँचा हो
बस अपने कदमो में जगह देदे माँ
माँ तेरी बहुत याद आती हे तू कहा हे माँ, आ आज तेरी बहुत याद आ रही हे माँ
माँ तेरे हाथो का खाना खाये बहुत दिन हो गए,बस एक बार अपने हाथो से खिलादे माँ
माँ माँ गले लगा ले माँ
आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
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time :- 11:51 pm
29,march 2012

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