Wednesday, 2 May 2012

माँ बेटी की बाते Poem No.2 (chandan rathore)

http://www.facebook.com/chansrathore?ref=tn_tnmn
Poem No. 2
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माँ बेटी की बाते
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मेरा मन देखने को तरसे ये संसार
मुझे भी माँ की गोद में खेलने का हक़ है
मेरे भी कुछ सपने है जो में अपने माँ और पिता के लिए करना चाहती हूँ

मुझे मारने से आप लोग तो किसी ना किसी पाप से बच जाओगे
पर क्या कभी अपने आप को माफ़ कर पाओगे

जब देखोगे किसी बच्ची  को किसी की गोद में तो में जरुर याद आऊँगी

जब कोई बच्ची स्कूल जाएगी तो में याद आ ही जाऊँगी

जब किसी की बेटी अपनी माँ को माँ कह के बुलाएगी तो में जरुर याद आऊँगी

फिर तुम पछताओगी काश मै उसे नही मारती तो आज में भी किसी की माँ होती

माँ तू अपने आप को दोष मत दे तूने तो अच्छा  काम किया है अपना फर्ज पूरा किया है  पर में तुझे  कभी माफ़ नही कर पाऊँगी

माँ जब कोई बेटी अपने माँ और पिता का नाम रोशन करेगी तो मै जरुर याद आउंगी

माँ अब आंसू पोछ्ले वरना मै और मर जाऊँगी

माँ माँ मेरी माँ


आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
(Facebook,PoemOcean,Google+,Twitter,Udaipur Talents)

time: 5:37 pm
March 23 ,2012

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