Sunday, 31 March 2013

"मेरा अभिमान है बेटी " Poem No.66 (Chandan Rathore)


POEM No.66
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मेरा अभिमान है बेटी
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खो जाना है इस गुडिया को
उड़ जाना है एक दिन इस चिड़िया को

दुनिया की भीड़ में खो जाएगी एक दिन
अब सझाना है इस दुनिया को

बेटी दुलारी मेरी अंखियो  का पानी  है
बेटी एक सपनो की पुडिया है
कही फेक ना देना उस पुडिया को

बेटियां तो कांच की चूड़ियाँ  है
कही तोड़ ना देना उन चूडियो को

बेटी एक उजाला है अपने जीवन को
कही बुजा ना देना उस उजाले को

"फर्क क्या करते हो बेटा-बेटी में दोनों एक सामान है
जरा समझो बेटी होना भी एक अभिमान है "

उसकी याद तब आएगी जब वो जायेगी
दर्द उस दिन होगा जब वो रोयेगी
उसे क्यों मारने में लगे हो
जो तुम्हारे जीवन को एक दिन स्वर्ग बनाएगी

आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़

08:36pm, Mon 18-03-2013

Thursday, 21 March 2013

माँ 'बस नाम ही काफी है' Poem No.59 (Chandan Rathore)


Poem No.59
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माँ 'बस नाम ही काफी है'
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भोली सी सूरत ममता की वो मूरत
भगवान् के जेसी हर इन्सान की वो जरुरत

हाथ उसके कोमल व खुद कितनी प्यारी वो मूरत
अब क्या कहना माँ का उसकी गोदी में है जन्नत

माँ बिन सुना है हर लम्हा मेरा
माँ रखती कितना ख्याल मेरा

माँ तू बहुत याद आती है
माँ तेरी याद बहुत रुलाती है

मै मजबूर तेरे बिन मेरे अहसासों में तुम हो
तुम बिन मै कुछ भी नही मेरी सारी खुवाईशो  में तुम हो

तेरे दीदार को तरसता हूँ
तेरे हाथ से खाने को तरसता हूँ
तेरी डांट खाने को जी करता है
तेरे पास आने को जी करता है

माँ एक परछाई है  भगवान की
माँ दावा है मेरे हर जख्मो की

माँ तू कितना दुःख देखती थी मेरे लिए
माँ तू कितना रोती थी मेरे लिए

"ना सताओ माँ को ,इतना ना रुलाओ माँ को
दुःख की गहरी खान हे माँ
अब सब ख़ुशी देदो तुम अपनी माँ को"



आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़

10:21pm, Sun 10-03-2013

"बेटी की विदाई " POEM No. 58 (Chandan Rathore)



Poem No.58
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष पर आप के सामने
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बेटी की विदाई
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बिटिया रानी छोड़ के मुझको जाने वाली
नाजो में पली खुशियों में खिली
हर कदम पे मुझे हँसाने वाली
दुःख के बदले सुख  देने वाली

आज तू छोड़ चली अपने पिता का घर
केसे कहूँगा में अब इसे घर
आशाओ की जडिया फूलो की पंखुड़िया
अब क्या बताऊ कितनी प्यारी मेरी बेटिया

अब किस पे इतना गर्व  करूँगा   में
केसे तुम बिन रहूँगा में
विदा हो रही आज खुशिया मेरी
विदा  हो रही आज धन-दोलत मेरी
मेरी खुशिया तो बेटी थी अब कोनसी ख़ुशी मेरी

विदाई ने आज पत्थर दिल रखने वाले पिता को रुला दिया
बेटी आज तुझे   मेने  कितना  रुला दिया
तुम रहना खुश ये मेरी इच्छा है
तुम्हे हर कदम पे ख़ुशी  मिले ये मेरी दुआ हे

बेटी तू रोना बंद कर दे
तेरा सारा रोना आज मुझे दान कर दे
तू छोड़ चली बाबुल का घर
आज सुना कर गई अपना घर

बेटी को इतनी जल्दी ना ले जाओ कहारों, मुझे थोडा और मिलने तो दो 
इतनी बड़ी की मेरी बेटी को उसे खोकर मुझे संभल तो लेने दो

केसी ये अपनों की जुदाई हे
केसी ये बेटी की विदाई हे
केसी ये बेटी की विदाई हे



आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
8:56 AM
07/03/2013

Me Aaj Tumhari hui Poem No.44 (Chandan Rathore)



Poem No.44
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Me Aaj Tumhari hui
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Tum mere jivan k ishvar or me tumhari mala hui

tum ne thama haat mera me sharm k mare pani pani hui

aake bharlo bhaho me tum ho priytam mere
ab me bhi tumhare dil ki rani hui

tum hari hasi k aage phol bhi sharma jaye
me to tumhari aaj premdiwani hui

tumhara andaj sabse nirala he
me shadi k shaat aaj tumhari hui

ek hi khwais he kabhi muje na rulana kabhi muje na satana
aaj me shaat fero k shaat tumhari ardhangini hui

6od aai me apne babul ka ghar unke liye aaj me parai hui
banke tumhari dulhan aaj piya k ghar ki bahurani hui

mere liye ab tumhari khusi hi meri khusi he
meri har bachpan ki khusi aaj begani hui

6od kar sab khuch apna me tumhare dil ki rani hui



आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
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8:43 AM
17-2-2013

"मेरी दीदी " Poem No.53 (Chandan rathore)



POEM No.53
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मेरी दीदी
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साथ जो देती दीदी मेरी
डाटती  भी बहुत हर गलती पे मेरी
माँ की परछाई होती है दीदी
हर ख़ुशी देती मेरी दीदी

कभी ना होना दूर मुझसे
मेरी जान है मेरी दीदी

दीदी तू कब मिलेगी मुझे
जाने कब आएगी मेरे पास मेरी दीदी

में अकेला पड़ जाता हु जब होती नही पास मेरे
में अधुरा सा होता हु जब दूर होती है मेरी दीदी

दीदी तुम्हारे पास आने को दिल करता है
दीदी आप से मिलने को दिल करता है

दीदी तुम ना होती तो मुझे कोण संभलता
माँ की कमी को कोण पूरी करता

में ना होता आप की तकलीफों में शामिल
तू मुझे मिली जेसे किसी बिछड़े हुई नाव को मिला हो जेसे शाहिल

जन्म  दिन मुबारक हो दीदी
आप का भाई


आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
08:40pm, Tue 26-02-2013

Mehandi Poem No.49 (Chandan rathore)



POEM NO. 49
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MEHANDI
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Mehandi jo dilo me rang chadhati he
mahndi se bhare haato se jo khusbu aati he

mehndi jo orat ka sringar hoti he
mehndi jo piya ke name ki rach jaati he

mehndi ki rasme jo sab ko bhati he
mehndi jo khuch rang 6od jaati he

mehndi rache haatho ki to baat kya
saji dhaji dulhan mahndi bin uska sringar kya

mahndi rachegi uski to pyar gahra hoga
bin mahndi har kaam adhura hoga

mehndi he surange rango wali
gori hateliyo me mahndi jab usne rachai

hatlewa me mahndi
har tyohar me aage mehndi
shadi me ronak lati mehndi

mehndi bani he rachne k liye
use rachna hi hoga
mehndi sa suhana or koi na hoga



आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
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2:41AM
22/2/013

"माँ तुम बहुत याद आती हो" Poem No.39 (Chandan Rathore)


Poem No.39
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 माँ तुम बहुत याद आती हो
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माँ तुम दिल में बस्ती हो
माँ तुम मेरी नस नस में बस्ती हो

माँ जब में रोता था
मुझे चुप कराते-कराते खुद रो पड़ती थी
मुझे सुलाते सुलाते खुद सो जाती थी

मुझे स्कूल छोड़ते वक्त खुद बच्चा बन जाती थी
मेरे घर ना आने पर तू बहुत घबराती थी

माँ जब में दोड़ता तो तू मेरे पीछे-पीछे भाग कर तू थक जाती थी
माँ तेरी याद रुला जाती हे
माँ तुम्हारी कमी बहुत सताती हे

याद है मुझे जब वो रोटी पे हद से ज्यादा तेरा घी रखना
भूख ना होने पर भी तेरा वो मुझे खाना खिलाना

माँ तू बहुत प्यारी हे
माँ तू सब से न्यारी है

सुबह जल्दी  उठ कर तेरा वो टिफिन बनाना
मुझे अपने हाथ से खिला कर फिर तेरा वो खाना खाना

माँ बहुत याद आती हे तेरी
माँ बहुत याद आती बाते तेरी


आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़


03:33pm, Fri 08-02-2013

"बेटी के हजारो सपने" Poem No.37 (Chandan Rathore)



 Poem No.37
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 बेटी के हजारो सपने
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नन्ही सी आखों  में हजारो सपने
फिर भी उसे मारने में लगे हे उसके अपने

कोमल पंखुडियो सी उन्की काया
फिर भी उन्हें बचाने को कोई आगे ना आया

कही पत्थर रख कर तो कही पलने में छोड़ के जा रहे है लोग
क्यों अपने कलेजे के टुकड़े को मार रहे हे लोग

रोटी चीखती चिलाती माँ को पुकारती है बेटिया
मुझे समझ नही आता उन्हें प्यारी क्यों नही हे बेटिया

बचाओ बचाओ अब तो बचाओ बेटियों को
वंश लता को बचाओ मत मानो पाप बेटियों को

बेटी बचाओ हाथ  बढाओ



आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
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Time-9:48 Am
Date - 27-1-013