POEM No.66
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मेरा अभिमान है बेटी
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खो जाना है इस गुडिया को
उड़ जाना है एक दिन इस चिड़िया को
दुनिया की भीड़ में खो जाएगी एक दिन
अब सझाना है इस दुनिया को
बेटी दुलारी मेरी अंखियो का पानी है
बेटी एक सपनो की पुडिया है
कही फेक ना देना उस पुडिया को
बेटियां तो कांच की चूड़ियाँ है
कही तोड़ ना देना उन चूडियो को
बेटी एक उजाला है अपने जीवन को
कही बुजा ना देना उस उजाले को
"फर्क क्या करते हो बेटा-बेटी में दोनों एक सामान है
जरा समझो बेटी होना भी एक अभिमान है "
उसकी याद तब आएगी जब वो जायेगी
दर्द उस दिन होगा जब वो रोयेगी
उसे क्यों मारने में लगे हो
जो तुम्हारे जीवन को एक दिन स्वर्ग बनाएगी
आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
08:36pm, Mon 18-03-2013




