Thursday, 17 January 2013

"बेटी बचालों" Poem No.31 (Chandan Rathore)



Poem No.31
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 बेटी बचालों
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जहा सडको पर फेकी जाती है बेटिया
जहा कत्ले आम होती हे बेटिया
जहा गुट गुट के मरती है  बेटिया

जहा ६ लोगो से अकेला लड़ना पड़ता हो
जहा तड़प-तड़प के मरना पड़ता हो

ये सब क्यों सहे अपनी बेटिया

क्यों करते हो जलते दियो को बजाने की कोशिस
क्यों करते हो खिलते हुए फुल को मुर्जाने की कोशिस

बेटिया तो अपना नाज है
क्यों नही बचती उनकी लाज है

कोई तो आगे  आओ उन्हें बचाने को
कोई तो आगे आये उन्हें अपना ने को


बेटी बचाओ हाथ  बढाओ


आपका शुभचिंतक
लेखक - चन्दन राठौड़
(Facebook,PoemOcean,Google+,Twitter,Udaipur Talents)
समय 07:23 am
दिनांक -Sat 12-01-2013